माँ की महिमा अपरम्पार

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Navratri Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

माँ की महिमा अपरम्पार, भगत के कष्ट मिटाती है..2

कष्ट मिटाती है,माँ दुखडे दूर भगाती है माँ की ..2

माँ की महिमा अपरम्पार, भगत के कष्ट मिटाती है..

कटरा में वो वास है करती, होके सिंह सवार..2

बाण गंगा का अमृत पानी, सबका करे उद्वार..2

कठिन चढाई तुम भी चढ़लो..2, हो जाये बेडा पार

माँ की ..2,माँ की महिमा अपरम्पार, भगत के कष्ट मिटाती है..

हमने सुना तु भेद ना करती, रखती सबका मान...2

देखे न राजा रंक न देखे, सब है एक समान.. 2

भाव से तुम भी माँ को मना लो, पूरी करती आस

माँ की ..2,माँ की महिमा अपरम्पार, भगत के कष्ट मिटाती है..

ध्यान ने पूजा, श्रीधर पूजे, पूजे तेरा नन्दलाल...2

देवी देवता मंगल गावे, करे तेरी जयकार..2

शंकर तेरे भजन है गाता..2, रख दे सिर में हाथ

माँकी ..2, माँ की महिमा अपरम्पार, भगत के कष्ट मिटाती है..

Singer:-Shankar Yadav

Music:-Ujjawal Kumar

Lyrics:-Shankar Yadav

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।