माँ हो तो ऐसी हो ऐसी हो

संत सूरदास
महादेव भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हाँ माँ हो तो ऐसी हो ऐसी हो

ऐसी हो काली मैय्यां तेरे जैसी हो

हाँ माँ हो तो ऐसी हो ऐसी हो

अरे ऐसी हो काली मैय्यां तेरे जैसी हो

महाकाली मैय्यां तेरे जैसी हो

महाकाली मैय्यां तेरे जैसी हो

अद्भुत हैं रूप तेरा शक्ति अपार

परिहार भ्र्म भी पाए न पार

सुनले पुकार मेरी नैय्यान मजधार

कर बेडा पार तेरा बड़ा उपकार

हाँ अद्भुत हैं रूप तेरा शक्ति अपार

परिहार भ्र्म भी पाए न पार

सुनले पुकार मेरी नैय्यान मजधार

कर बेडा पार तेरा बड़ा उपकार

सूरत हैं न्यारी सबसे तू प्यारी

जाए हम वारि तेरी बलिहारी

रक्त बालहरिणी रक्त पुश धारिणी

कष्ठ-निवारिणी मंगल कारिणी

माँ हो तो ऐसी हो ऐसी हो

ऐसी हो काली मैय्यां तेरे जैसी हो

हाँ माँ हो तो ऐसी हो ऐसी हो

ऐसी हो काली मैय्यां तेरे जैसी हो

महाकाली मैय्यां तेरे जैसी हो

महाकाली मैय्यां तेरे जैसी हो

चरणों में तेरे माँ दे दे शरण

दर्शन के प्यासे हैं ये दो नयन

गाये भजन करे तेरा सुमिरन

करे दिन रात माइयाँ तेरा किर्तन

हाँ चरणों में तेरे माँ दे दे शरण

दर्शन के प्यासे हैं ये दो नयन

गाये भजन करे तेरा सुमिरन

करे दिन रात माइयाँ तेरा किर्तन

मन्नत सभी की पूरी तू करती

आये तेरे द्वार जो भी नर नारी

माइयाँ तू दयालु है माइयाँ तू कृपाली है

तू हैं दुःख हरनी तू सुख करनी

माँ हो तो ऐसी हो ऐसी हो

अरे ऐसी हो काली मैय्यां तेरे जैसी हो

हाँ माँ हो तो ऐसी हो ऐसी हो

ऐसी हो काली मैय्यां तेरे जैसी हो

महाकाली मैय्यां तेरे जैसी हो

महाकाली मैय्यां तेरे जैसी हो

महाकाली मैय्यां तेरे जैसी हो

महाकाली मैय्यां तेरे जैसी हो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।