माँ दिल के इतने करीब है तू

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Mata Rani Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

माँ दिल के इतने करीब है तू,

जिधर भी देखूं नज़र तू आए,

जो आँखे बंद करके माँ मैं देखूं,

तू ही तू मैया नज़र है आए,

मां दिल के इतने करीब है तू,

जिधर भी देखूं नज़र तू आए ॥

कोई है राजा है कोई भिखारी,

ये कैसी लीला है माँ तुम्हारी,

किसी को तरसाए एक दाना,

कही पे भंडार तू लगाए,

मां दिल के इतने करीब है तू,

जिधर भी देखूं नज़र तू आए ॥

रोजाना दर पे लगे है मेले,

नसीब वाले तो जय माँ बोले,

कोई माँ लाया है तेरा चोला,

किसी की आँखों में नीर आए,

मां दिल के इतने करीब है तू,

जिधर भी देखूं नज़र तू आए ॥

कोई माँ सोने का हार लाया,

माँ कोई चांदी का छत्र लाया,

किसी ने चुनरी है माँ चढ़ाई,

कोई तो बदहाल दर पे आए,

मां दिल के इतने करीब है तू,

जिधर भी देखूं नज़र तू आए ॥

माँ दिल के इतने करीब है तू,

जिधर भी देखूं नज़र तू आए,

जो आँखे बंद करके माँ मैं देखूं,

तू ही तू मैया नज़र है आए,

मां दिल के इतने करीब है तू,

जिधर भी देखूं नज़र तू आए ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।