माँ भवानी तारणी

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

नवदुर्गा, दुर्गा पूजा, नवरात्रि, नवरात्रे, नवरात्रि, माता की चौकी, देवी जागरण, जगराता, शुक्रवार दुर्गा तथा अष्टमी के शुभ अवसर पर गाये जाने वाला प्रसिद्ध व लोकप्रिय भजन।

माँ भवानी तारणी,

हे धराणी तार दे

हे प्रसूता जगत की,

गत मेरी उद्धार दे

माँ भवानी तारणी,

हे धराणी तार दे

ब्रह्मरूपा वेदरूपा

काल की तू स्वामिनी

तीन लोकों की है रानी

रूद्र की तू भामिनी

कामना को पंख दे,

कामिनी आकार दे

माँ भवानी तारणी,

हे धराणी तार दे

तू ही काली तू रमा है

शारदा का सार है

शिवस्वरूपा और हरि है

आत्मभू करतार है

साँस के गीतों को माँ,

रागिनी विस्तार दे

माँ भवानी तारणी,

हे धराणी तार दे

तेरी बगिया सारी दुनिया

मैं भी इसका फूल हूँ

तेरे दम से चल रहा

तेरे पग की धूल हूँ

सत्य चित आनंद दे,

भव के भय से पार दे

माँ भवानी तारणी,

हे धराणी तार दे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।