माँ देख तेरा श्रृंगार, करे दिल नाचण का

संत सूरदास
माता दुर्गा भजन Bhajan Navratri Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

माँ देख तेरा श्रृंगार,

करे दिल नाचण का,

नाचण का दिल नाचण का,

चाहे देखूं जितनी बार,

करे दिल नाचण का,

मां देख तेरा श्रृंगार,

करे दिल नाचण का ॥

प्यारी सूरत भोली भाली,

सोहे नथनी बिंदियाँ वाली,

प्यारा लागे गले का हार,

करे दिल नाचण का,

मां देख तेरा श्रृंगार,

करे दिल नाचण का ॥

ऐसा कोई फूल बचा ना,

जो तेरे गजरे में सजा ना,

माँ महक रहा संसार,

करे दिल नाचण का,

मां देख तेरा श्रृंगार,

करे दिल नाचण का ॥

कितना सुन्दर कितना प्यारा,

देख ले ‘सोनू’ आज नजारा,

क्या खूब सजा दरबार,

करे दिल नाचण का,

मां देख तेरा श्रृंगार,

करे दिल नाचण का ॥

माँ देख तेरा श्रृंगार,

करे दिल नाचण का,

नाचण का दिल नाचण का,

चाहे देखूं जितनी बार,

करे दिल नाचण का,

मां देख तेरा श्रृंगार,

करे दिल नाचण का ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।