लूटूरू महादेव चलो

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

लूटरू महादेव जय जय,

लुटरू महादेव जी,

लूटूरू महादेव चलो,

लूटूरु महादेव जी,

सारी दुनियां ध्याए,

गाए गुण महादेव जी,

लुटरू महादेव चलो,

लूटरु महादेव जी ॥

तुम सा ना कोई जग में है दाता,

जो दर जाता है सब कुछ पाता,

झोली भर के लाता,

भाता लुटरू महादेव जी,

लूटरू महादेव जय जय,

लुटरू महादेव जी,

लूटरू महादेव चलों,

लूटरु महादेव जी ॥

है गुफा का गज़ब नज़ारा,

बाबा भारती जी ने हाथों से श्रृंगारा,

देते हैं सहारा,

मार सुटा महादेव जी,

लूटरू महादेव जय जय,

लुटरू महादेव जी,

लूटरू महादेव चलों,

लूटरु महादेव जी ॥

मेरी भी बाबा अब करो सुनवाई,

है कष्ट बहुत नहीं लगती दवाई,

बनेंगे सहाई,

‘ओम सैन’ महादेव जी,

लूटरू महादेव जय जय,

लुटरू महादेव जी,

लूटरू महादेव चलों,

लूटरु महादेव जी ॥

दर्शन को ‘अभिजीत’ है आया,

दिल की मुरादें साथ में लाया,

भजन सुनाया,

पाया वर महादेव जी,

लूटरू महादेव जय जय,

लुटरू महादेव जी,

लूटरू महादेव चलों,

लूटरु महादेव जी ॥

लूटरू महादेव जय जय,

लुटरू महादेव जी,

लूटूरू महादेव चलो,

लूटूरु महादेव जी,

सारी दुनियां ध्याए,

गाए गुण महादेव जी,

लुटरू महादेव चलो,

॥ दोहा ॥

लूटरु महादेव जी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।