लहर लहर लहरा गई रे, मेरी माँ की चुनरियाँ, माँ की चुनरियाँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Navratri Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

लहर लहर लहरा गई रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ,

माँ की चुनरियाँ,

मेरी माँ की चुनरियाँ,

लहर लहर लहरा गयी रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ ॥

उड़के चुनरिया बरसाने को पहुंची,

उड़के चुनरिया बरसाने में पहुंची,

राधा जी के मन को भा गई रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ,

लहर लहर लहरा गयी रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ ॥

उड़के चुनरिया अयोध्या को पहुंची,

उड़के चुनरिया अयोध्या में पहुंची,

सिता जी के मन को भा गई रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ,

लहर लहर लहरा गयी रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ ॥

उड़के चुनरिया हरिधाम को पहुंची,

उड़के चुनरिया हरिधाम में पहुंची,

लक्ष्मी जी के मन को भा गई रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ,

लहर लहर लहरा गयी रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ ॥

उड़के चुनरिया कैलाश को पहुंची,

उड़के चुनरिया कैलाश में पहुंची,

गौरा जी के मन को भा गई रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ,

लहर लहर लहरा गयी रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ ॥

उड़के चुनरिया मेवाड़ को पहुंची,

उड़के चुनरिया मेवाड़ में पहुंची,

मीरा जी के मन को भा गई रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ,

लहर लहर लहरा गयी रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ ॥

उड़के चुनरिया कीर्तन में पहुंची,

उड़के चुनरिया कीर्तन में पहुंची,

भक्तों के मन को भा गई रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ,

लहर लहर लहरा गयी रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ ॥

लहर लहर लहरा गई रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ,

माँ की चुनरियाँ,

मेरी माँ की चुनरियाँ,

लहर लहर लहरा गयी रे,

मेरी माँ की चुनरियाँ ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।