लीले पे चढ़के आ जा सांवरिया

संजय मित्तल
अन्य भजन भजन संजय मित्तल
॥ दोहा ॥

नीला घोड़ा सोहणा, बाजे घुंघरू पाँव।
चढ़ के आवे सांवरो, पावन कीनो गाँव॥

॥ चौपाई ॥

लीले पे चढ़के आ जा सांवरिया, लीले पे चढ़के आ जा।
भक्त पुकार रहे हैं तुझको, जल्दी से तू आ जा॥
लीले पे चढ़के आ जा सांवरिया॥

मोरमुकुट सिर पर सोहे, कानों में कुंडल चमके।
तेरी सुंदर छवि देखकर, सारा संसार ये दमके॥
हाथ में मोरछड़ी लहराते, मंद मंद मुस्काते॥
लीले पे चढ़के आ जा सांवरिया॥

कीर्तन में तेरी जोत जलाई, छप्पन भोग सजाए।
तेरे स्वागत में सांवरिया, पलक पाँवड़े बिछाए॥
आकर भोग लगाओ बाबा, दर्शन देकर हर्षाओ॥
लीले पे चढ़के आ जा सांवरिया॥

संजय मित्तल गाए तराने, तेरे ही गुणगान के।
तेरे सिवा कोई और ना भावे, खाटू के भगवान के॥
लीले पे चढ़के आ जा सांवरिया, लीले पे चढ़के आ जा॥

॥ दोहा ॥

नीले घोड़े का असवार, संकट काटे सारे।
संजय मित्तल शरण में, जय जय श्याम उचारे॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

नीले घोड़े पर सवार होकर अपने भक्तों के संकीर्तन और घर-आँगन में पधारने के लिए बाबा श्याम को सादर निमंत्रण देने वाला लोकप्रिय भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।