ले लो शरण कन्हैया अपनी शरण में

संजय मित्तल
श्री कृष्ण भजन भजन संजय मित्तल
॥ दोहा ॥

शरण पड़े को राखिए, तजिए ना प्रभु आप।
तुम बिन जग में कौन है, हरने वाला ताप॥

॥ चौपाई ॥

ले लो शरण कन्हैया अपनी शरण में, रख लो शरण कन्हैया अपनी शरण में।
भटक गया था जग के वन में, अब आया हूँ तेरे चरन में॥
ले लो शरण कन्हैया अपनी शरण में॥

माया के फंदे बड़े ही निराले, उलझा दिया मुझको इस जग वाले ने।
तू ही बता अब कहाँ मैं जाऊं, किसको ये दुखड़ा अपना सुनाऊं॥
आँसू भरे हैं इन नैनन में, ले लो शरण कन्हैया अपनी शरण में॥

तेरे सिवा कोई बंधु ना मेरा, तू ही तो है प्रभु सच्चा सहारा।
तूने पतितों को पावन बनाया, डूबतों को तूने किनारे लगाया॥
मुझको भी तारो इस जीवन में, ले लो शरण कन्हैया अपनी शरण में॥

संजय मित्तल गाए दीन पुकार, सुन लो हमारे पालनहार।
राधे श्याम की जय जयकार, जय जय खाटू के सरकार॥
ले लो शरण कन्हैया अपनी शरण में॥

॥ दोहा ॥

शरणागत वत्सल प्रभु, मिटे सकल भव त्रास।
संजय मित्तल को मिले, वृंदावन को बास॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

मायावी संसार में भटके हुए जीवात्मा का भगवान श्री कृष्ण और खाटू श्याम के चरणों में पूर्ण शरणागति का यह अत्यंत मार्मिक भजन है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।