शरण पड़े को राखिए, तजिए ना प्रभु आप।
तुम बिन जग में कौन है, हरने वाला ताप॥
ले लो शरण कन्हैया अपनी शरण में, रख लो शरण कन्हैया अपनी शरण में।
भटक गया था जग के वन में, अब आया हूँ तेरे चरन में॥
ले लो शरण कन्हैया अपनी शरण में॥
माया के फंदे बड़े ही निराले, उलझा दिया मुझको इस जग वाले ने।
तू ही बता अब कहाँ मैं जाऊं, किसको ये दुखड़ा अपना सुनाऊं॥
आँसू भरे हैं इन नैनन में, ले लो शरण कन्हैया अपनी शरण में॥
तेरे सिवा कोई बंधु ना मेरा, तू ही तो है प्रभु सच्चा सहारा।
तूने पतितों को पावन बनाया, डूबतों को तूने किनारे लगाया॥
मुझको भी तारो इस जीवन में, ले लो शरण कन्हैया अपनी शरण में॥
संजय मित्तल गाए दीन पुकार, सुन लो हमारे पालनहार।
राधे श्याम की जय जयकार, जय जय खाटू के सरकार॥
ले लो शरण कन्हैया अपनी शरण में॥
शरणागत वत्सल प्रभु, मिटे सकल भव त्रास।
संजय मित्तल को मिले, वृंदावन को बास॥