लता मंगेशकर

पारंपरिक
माता सरस्वती संत साहित्य Bhakt Night Angel Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

स्वर कोकिला के नाम से विख्यात भारत रत्न लता मंगेशकर एक प्रसिद्ध भारतीय पार्श्व गायिका, भजन गायिका और सामयिक संगीतकार थीं। उन्हें भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे महान और सबसे प्रभावशाली गायिकाओं में से एक माना जाता है।

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ही लता मंगेशकर को स्वर कोकिला की उपाधि दी थी। लता मंगेशकर का मशहूर गाना 'ऐ मेरे वतन के लोगों', जिसे सुन प्रधानमंत्री नेहरू की भर आईं थी आंखें भारत के सर्वश्रेष्ठ देशभक्ति गीतों में शुमार किए जाने वाले 'ऐ मेरे वतन के लोगों' को पहली बार 27 जनवरी 1963 में गाया गया था।

स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर को यूं ही स्वर कोकिला नहीं कहा जाता था। उनकी आवाज में वो खनक और अहसास था, जो उन्हें औरों से अलग बनाता था। वह भारत की सबसे सम्मानित गायिका में से एक थीं। वह बहुत छोटी थी जब उन्होंने संगीत की दुनिया में कदम रखा था। फिर 13 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार गाना भी गाया था। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन संगीत में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाता रहेगा।

लता मंगेशकर के बारे में

नाम: लता दीनानाथ मंगेशकर

जन्म: 28 सितंबर 1929, इंदौर

निधन: 6 फरवरी 2022 (उम्र 92 वर्ष), ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल ट्रस्ट, मुंबई

पुरस्कार: भारत रत्न, पद्म भूषण, पद्म विभूषण, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

पिता: दीनानाथ मंगेशकर

भाई-बहन: आशा भोसले, हृदयनाथ मंगेशकर, मीना खादिकर, उषा मंगेशकर

वैवाहिक स्थिति: अविवाहित (लता मंगेशकर ने अपने छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी के चलते कभी शादी नहीं की)

लता मंगेशकर प्रसिद्ध भजन सूची

❀ यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ - माँ संतोषी भजन

❀ छोटी-छोटी कन्याएं: भजन

❀ वंदना: ज्ञान का दान ही सबसे बड़ा हैं

❀ ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियां: भजन

❀ करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं - माँ संतोषी भजन

❀ भजन: बृन्दावन का कृष्ण कन्हैया

❀ वंदना: ज्ञान का दान ही सबसे बड़ा हैं

❀ श्री हनुमान जी आरती

❀ श्री बजरंग बाण पाठ

❀ श्री राम स्तुति: श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन

❀ प्रभू तेरो नाम

❀ वंदना: ज्ञान का दान ही सबसे बड़ा हैं

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

लता मंगेशकर | Lata Mangeshkar

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।