लड़ लगन तो पहला दांतिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ दोहा ॥

लड़, लग्गण तों पहला, दातिए, कुछ वी, नहीं सां मैं ॥

॥ चौपाई ॥

दर, आउण तों पहला, दातिए, कुछ वी, नहीं सां मैं ॥

मेरा, हथ तूं फड़िया, मेरा, घर तूं भरिया ॥

जदों दी, तेरे लड़, लग्गी आं मैं...

लड़, लग्गण तों पहला, दातिए, कुछ वी...

तेरा, करां शुक्रिया, चरणां दे नाल, लाया तूं,

कोई, पुछदा नहीं सी, दुनियां नाल, मिलाया तूं ॥

रहमत ना, करदी ॥ दाती थां थां, रुल्लणा सी मैं ।

लड़, लग्गण तों पहला, दातिए, कुछ वी…

संतो की वाणी लिरिक्स

जिंद, तेरी, मस्ती दे विच, चलदी रहिंदी ए,

भारी तों, भारी मुश्किल, टलदी रहिंदी ए ॥

मां माड़ा, होण नी देंदी ॥ कहिंदी तेरे, नाल खड़ी आं मैं ।

लड़, लग्गण तों पहला, दातिए, कुछ वी...

तेरा, मनी लाडला, महिमा, तेरी गावें मां,

लिखदा नहीं, चंदर सराए, आप लिखावें मां ॥

हुण कोई, डुब नी सकदा ॥ तेरे चरणां विच, ही हां मैं ।

लड़, लग्गण तों पहला, दातिए, कुछ वी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।