कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माहि।
ऐसे घट घट राम हैं, दुनिया देखै नाहि॥
सूरश्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा॥
विघ्न हरण मंगल करन, श्री गणपति महाराज।
प्रथम निमंत्रण आपको, पूर्ण कीजो काज॥
मन भज ले तू पावन नाम, यही है सच्चा विश्राम।
संसार के सब रिश्ते झूठे, एक सहारा राम॥
सूरश्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा॥
विघ्न हरण मंगल करन, श्री गणपति महाराज।
प्रथम निमंत्रण आपको, पूर्ण कीजो काज॥
कहत कबीर सुनो भाई साधो, शब्द गहो चित लाय।
हरि सुमिरन बिन मुक्ति नाहीं, जनम अकारथ जाय॥