लाखो के दुःख लिए हर दातिए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

लाखो के दुःख लिए हर दातिए,

झोलियाँ गरीबों की भी भर दातिए,

सबको दिए खुशियों के वर दातिए,

सबको दिए खुशियों के वर दातिए,

झोलियाँ गरीबों की भी भर दातिए ॥

भरे हुए तेरे भंडार है,

उनमे कमी ना किसी बात की,

हर जगह पर हर और ही,

करुणा की तूने तो बरसात की,

सबपे है तेरी,

सबपे है दया की नजर दातिए,

झोलियाँ गरीबों की भी भर दातिए ॥

सागर से एक बून्द हम जो पिए,

सागर का कुछ ना घटे मेरी माँ,

हवा चला दो गर रहमत की माँ,

बादल गमो का छटे मेरी माँ,

जग से निराला,

जग से निराला तेरा दर दातिए,

झोलियाँ गरीबों की भी भर दातिए ॥

लाखो के दुःख लिए हर दातिए,

झोलियाँ गरीबों की भी भर दातिए,

सबको दिए खुशियों के वर दातिए,

सबको दिए खुशियों के वर दातिए,

झोलियाँ गरीबों की भी भर दातिए ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।