लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हार की कोई चिंता नहीं,

पग पग होगी जीत,

लगी रे मेरी लगी रे मेरी,

लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत,

मात मात का नगमा गाए,

मात मात का नगमा गाए,

ये जीवन संगीत,

लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत ॥

मौज से होने लगा गुजारा,

मैया ने हर काम संवारा,

सन्मुख मिलती मात भवानी,

जब जब माँ को मन से पुकारा,

देती नहीं विश्वास टूटने,

देती नहीं विश्वास टूटने,

माँ अम्बे की रीत,

लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत ॥

जब जब मन से माँ को पुकारा,

मैया का संदेसा आया,

मोह लोभ जो लगा भरमाने,

मैया ने खुद आप बचाया,

ऐसा किया मेरी मैया ने जादू,

ऐसा किया मेरी मैया ने जादू,

संवरा भविष्य अतीत,

लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत ॥

‘सरल’ भवानी का है चाकर,

हाथ पकड़कर तूने उबारा,

गम के थपेड़ो से डोली थी नैया,

बनके खिवैया मैया तूने तारा,

‘रामकुमार’ डूबेगा कैसे,

‘रामकुमार’ डूबेगा कैसे,

माँ से जिसकी प्रीत,

लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत ॥

हार की कोई चिंता नहीं,

पग पग होगी जीत,

लगी रे मेरी लगी रे मेरी,

लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत,

मात मात का नगमा गाए,

मात मात का नगमा गाए,

ये जीवन संगीत,

लगी रे मेरी मैया जी से प्रीत ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।