लाज रखो हे कृष्ण मुरारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

लाज रखो हे कृष्ण मुरारी,

हे गिरधारी हे बनवारी,

हे गिरधारी हे बनवारी,

लाज रखों हे कृष्ण मुरारी ॥

कहता है खुद को बलशाली,

कहता है खुद को बलशाली,

खिंच रहा,

खिंच रहा अबला की साड़ी,

लाज रखों हे कृष्ण मुरारी,

हे गिरधारी हे बनवारी,

हे गिरधारी हे बनवारी,

लाज रखों हे कृष्ण मुरारी ॥

मैं समझी थी एक है अंधा,

मैं समझी थी एक है अंधा,

यहाँ तो अंधी,

यहाँ तो अंधी सभा है सारी,

लाज रखों हे कृष्ण मुरारी,

हे गिरधारी हे बनवारी,

हे गिरधारी हे बनवारी,

लाज रखों हे कृष्ण मुरारी ॥

अब मैं आस करूँ कहो किस पर,

अब मैं आस करूँ कहो किस पर,

सबके सब,

सबके सब बैठे है जुआरी,

लाज रखों हे कृष्ण मुरारी,

हे गिरधारी हे बनवारी,

हे गिरधारी हे बनवारी,

लाज रखों हे कृष्ण मुरारी ॥

सर निचे करके बैठे है,

सर निचे करके बैठे है,

वही गदा वही,

वही गदा वही गांडीव धारी,

लाज रखों हे कृष्ण मुरारी,

हे गिरधारी हे बनवारी,

हे गिरधारी हे बनवारी,

लाज रखों हे कृष्ण मुरारी ॥

SantoKiVani Lyrics

लाज रखो हे कृष्ण मुरारी,

हे गिरधारी हे बनवारी,

हे गिरधारी हे बनवारी,

लाज रखों हे कृष्ण मुरारी ॥

- श्री फणीभूषण चौधरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।