क्यों घबराता है पल पल मनवा बावरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

क्यों घबराता है,

पल पल मनवा बावरे,

चल श्याम शरण में,

मिलेगी सुख की छाँव रे,

जीवन की राह में,

थक गए हो तेरे पाँव रे,

ओ बावरे, ओ बावरे,

क्यूँ घबराता है,

पल पल मनवा बावरे,

चल श्याम शरण में,

मिलेगी सुख की छाँव रे ॥

जो शरण श्याम की लेले,

वो फिर क्यों संकट झेले,

जो श्याम भरोसे रहकर,

जीवन की बाज़ी खेले,

जीत जायेगा हर एक,

हारा दाव रे,

ओ बावरे, ओ बावरे,

क्यूँ घबराता है,

पल पल मनवा बावरे,

चल श्याम शरण में,

मिलेगी सुख की छाँव रे ॥

जो भी इस दुनिया में है,

श्री श्याम भरोसे चलता,

परिवार सदा ही जिसका,

बाबा की कृपा से पलता,

कभी ना रहता खुशियों,

का अभाव रे,

ओ बावरे, ओ बावरे,

क्यूँ घबराता है,

पल पल मनवा बावरे,

चल श्याम शरण में,

मिलेगी सुख की छाँव रे ॥

ये सारे जग का दाता,

हैं सबका भाग्य विधाता,

प्रेमी के हर आंसू का,

सांवरिया मोल चुकाता,

हर प्रेमी के संग है इसको,

लगाव रे,

ओ बावरे, ओ बावरे,

क्यूँ घबराता है,

पल पल मनवा बावरे,

चल श्याम शरण में,

मिलेगी सुख की छाँव रे ॥

सुख दुःख हस हस कर सहना,

पर दूर ना प्रभु से रहना,

ये तेरे संग रहेगा,

मानो ‘रोमी’ का कहना

इसको प्यारा है,

भक्त भजन और भाव रे,

ओ बावरे, ओ बावरे,

क्यूँ घबराता है,

पल पल मनवा बावरे,

चल श्याम शरण में,

मिलेगी सुख की छाँव रे ॥

क्यों घबराता है,

पल पल मनवा बावरे,

चल श्याम शरण में,

मिलेगी सुख की छाँव रे,

जीवन की राह में,

थक गए हो तेरे पाँव रे,

ओ बावरे, ओ बावरे,

क्यूँ घबराता है,

पल पल मनवा बावरे,

चल श्याम शरण में,

मिलेगी सुख की छाँव रे ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।