क्या कठिन परिस्थितियों या हालातों पर रोना चाहिए? (Kya Kathin Paristhitiyon Ya Halaton Par Rona Chahie?)

पारंपरिक
अन्य कथा Prerak-kahani Garun Dev Prerak-kahani
॥ पावन पाठ ॥

एक दिन की बात है एक चिड़िया आकाश में अपनी उड़ान भर रही होती है। रास्ते में उसे गरुड़ मिल जाता है। गरुड़ उस चिड़िया को खाने को दौड़ता है। चिड़िया उससे अपनी जान की भीख मांगती है। लेकिन गरुड़ उस पर रहम करने को तैयार नहीं होता। तब चिड़िया उसे बताती है कि मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं और उनके लालन-पालन के लिए मेरा जीवित रहना जरूरी है। तब गरुड़ इस पर चिड़िया के सामने एक शर्त रखता है कि मेरे साथ दौड़ लगाओ और अगर तुमने मुझे हरा दिया तो मैं तुम्हारी जान बख्श दूंगा और तुम्हें यहां से जाने दूंगा।

जब चिड़िया ने लगाई गरुड़ जी से दौड़

गरुड़ इस बात को जानता था कि चिड़िया का उसे दौड़ में हराना असंभव है। इसलिए उसके सामने इतनी कठिन शर्त रख देता है। चिड़िया के पास इस दौड़ के लिए हां करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता। लेकिन चिड़िया को इस बात का अंदाजा था कि गरुड़ को दौड़ में हराना नामुमकिन है लेकिन फिर बी वह इस दौड़ के लिए हां कर देती है। पर वह गरुड़ से कहती है कि जब तक ये दौड़ ख़त्म नहीं होता वह उसे नहीं मरेगा। गरुड़ इस बात पर राजी हो जाता है।

दौड़ शुरू होती है चिड़िया फट से जाकर गरुड़ के सिर पर बैठ जाती है और जैसे ही गरुड़ दौड़ के आखिरी स्थान पर पहुंचता है चिड़िया फट से उड़ कर लाइन के पार पहुंच जाती ही और जीत जाती है। गरुड़ उसकी चतुरता से प्रसन्न हो जाता है और उसको जिंदा छोड़ देता है। चिड़िया तुरंत ही वहां से उड़ जाती है और अपने रास्ते चल देती है।

कठिन परिस्थितियों में हालातों पर रोना नहीं चाहिए बल्कि समझदारी और चतुरता के साथ मुसीबत का सामना करना चाहिए। विरोधी या कार्य आपकी क्षमता से ज्यादा मजबूत हो तो इसका मतलब यह नहीं कि आप पहले से ही हार मान कर बैठ जाएं बल्कि समझदारी और धैर्य से बैठ कर समस्या का समाधान ढूढ़ना चाहिए। अअपने ऊपर एवं अपने प्रभु पर विश्वास रखना चाहिए, अगर प्रभु चाहें तो कोई भी किसी भी हालत में जीत सकते है।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

जब चिड़िया ने लगाई गरुड़ जी से दौड़ : एक दिन की बात है एक चिड़िया आकाश में अपनी उड़ान भर रही होती है। गरुड़ उस चिड़िया को खाने को दौड़ता है..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।