क्या करे इन हाथों का, इतने इतने हाथ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Navratri Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

क्या करे इन हाथों का,

इतने इतने हाथ,

कमसे कम दो सर पे रख दे,

देंगे आशीर्वाद ॥

बड़ी सरकार हो मैया,

हजारो हाथ वाली हो,

अगर तक़दीर से मेरे,

तेरे दो हाथ खाली हो,

हाथों को भी काम मिले,

बन जाए मेरी बात,

कमसे कम दो सर पे रख दे,

देंगे आशीर्वाद,

क्या करे इन हाथो का ॥

हाथ दो सर पे रखकर माँ,

अगर तुम भूल जाओगी,

फर्क कितना पड़ेगा माँ,

अगर दो कम बताओगी,

दो की गिनती ना करियो,

माँ बाकी के साथ,

कमसे कम दो सर पे रख दे,

देंगे आशीर्वाद,

क्या करे इन हाथो का ॥

हजारो हाथ रखवाते,

मगर ये बात काफी है,

ये बेड़ा पार लगाने को,

तेरे दो हाथ काफी है,

बाकी सारे याद रहे,

रहे ना दोनों याद,

कमसे कम दो सर पे रख दे,

देंगे आशीर्वाद,

क्या करे इन हाथो का ॥

हाथ माँ रखते ही तेरे,

ये आंसू गिर गिर ना जाए,

कलेजा ममता से तेरा,

अगर माँ भर भर ना जाए,

खिंच लियो बनवारी माँ,

सर से हाथों हाथ,

कमसे कम दो सर पे रख दे,

देंगे आशीर्वाद,

क्या करे इन हाथो का ॥

क्या करे इन हाथों का,

इतने इतने हाथ,

कमसे कम दो सर पे रख दे,

देंगे आशीर्वाद ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।