कुछ पल तो निकालों, भोले के दरबार के लिए

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ये जिंदगी मिली है,

दिन चार के लिए,

कुछ पल तो निकालो,

भोले के दरबार के लिए,

कुछ पल तो निकालों,

भोले के दरबार के लिए ॥

कई पूण्य किये होंगे जो,

ये मानव तन है पाया,

पर भूल गए भगवन को,

माया में मन भरमाया,

अब तक तो जीते आएं,

अब तक तो जीते आएं,

है परिवार के लिए,

कुछ पल तो निकालों,

बाबा के दरबार के लिए,

कुछ पल तो निकालों,

भोले के दरबार के लिए ॥

तूने पाई पाई जोड़ी,

कोई कमी कही ना छोड़ी,

पर संग में सुन ले तेरे,

ना जाए फूटी कोड़ी,

कुछ धरम पूण्य तो जोड़ो,

कुछ धरम पूण्य तो जोड़ो,

उस पार के लिए,

कुछ पल तो निकालों,

बाबा के दरबार के लिए,

कुछ पल तो निकालों,

भोले के दरबार के लिए ॥

ये जग है एक सराए,

कोई आए कोई जाए,

इसका दस्तूर पुराना,

कोई सदा ना टिकने वाला,

‘गजेसिंह’ शिवजी को भजलो,

‘गजेसिंह’ शिवजी को भजलो,

उद्धार के लिए,

कुछ पल तो निकालों,

बाबा के दरबार के लिए,

कुछ पल तो निकालों,

भोले के दरबार के लिए ॥

ये जिंदगी मिली है,

दिन चार के लिए,

कुछ पल तो निकालो,

भोले के दरबार के लिए,

कुछ पल तो निकालों,

॥ दोहा ॥

भोले के दरबार के लिए ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।