॥ दोहा ॥
बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम।
अरुण अधर जनु बिम्बफल, नयन कमल अभिराम॥
॥ चौपाई ॥
जय यदुनंदन जय जगवंदन। जय वासुदेव देवकी नंदन॥
नंद यशोदा के सुखदाता। राधापति त्रिभुवन विधाता॥
माखन चोरि दधि मटुकिया फोरी। गोपिन संग कीन्ही बरजोरी॥
कालिय नाग नाथि विष हरयो। गोवर्धन नख पर प्रभु धरयो॥
इंद्र को गर्व चूर प्रभु कीन्हो। गोकुल वासिन अभय वर दीन्हो॥
मथुरा जाइ कंस पछारयो। उग्रसेन को राज दिवालयो॥
अर्जुन रथ के सारथी भए। गीता ज्ञान अमोल सुनाए॥
द्रौपदी की प्रभु लाज बचाई। चीर बढ़ायो आप कन्हाई॥
॥ दोहा ॥
जो यह पाठ करै मन लाई। कृष्ण कृपा तापर सदा छाई॥
अंतकाल प्रभु पद पावे। जनम मरण के फंद छुड़ावे॥