कौन लंका जला पाता

संत सूरदास
श्री राम भजन Bhajan Hanuman Bhajan
॥ दोहा ॥

दोहा

॥ चौपाई ॥

देख के सागर की लहरों को,वानर सब घबराये ।

कैसे होगा पार ये सागर, मन ही मन सकुचाये ॥

जामवंत ने बजरंगी से जाकर करी गुहार

सिवा तुम्हारे कौन ये सागर कर पायेगा पार

कौन लंका जला पाता,अगर हनुमान न होते ।

पता न सीता का लग पाता अगर हनुमान न होते ॥

लाँघक़र के समंदर को, पहुँचे लंका के वो अंदर

देख़ हनुमान की ताकत, काँप उठ्ठा था दशकँधर

कौन सूरज निकल पता, अगर हनुमान ना होते

आ के शक्ति लगी ऐसी, मूर्छा खा गए लक्ष्मण

संजीवन बूटी लाने को, गए वो दौड़ के ततक्षण

कौन पर्वत उठा पाता, अगर हनुमान न होते

राम का नाम लेकर के, जो इनके पास जाते हैं

उनके जीवन की तकलीफें, ये पल भर में मिटाते हैं

कौन संकट मिटा पाता, अगर हनुमान न होते ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।