कोई नहीं जहाँ में, धनवान मेरे जैसा

पारंपरिक
हनुमान जी भजन Bhajan Hanuman Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

कोई नहीं जहाँ में,

धनवान मेरे जैसा,

दाता मिला गरीब को,

दाता मिला गरीब को,

हनुमान तेरे जैसा,

कोई नही जहाँ में,

धनवान मेरे जैसा ॥

किस्मत की है गरीबी,

तक़दीर का है पैसा,

तक़दीर का ये मालिक,

घबराना तेरा कैसा,

भक्तो को होना चाहिए,

भक्तो को होना चाहिए,

ये ज्ञान मेरे जैसा,

कोई नही जहाँ में,

धनवान मेरे जैसा ॥

सरकार सबसे ऊँची,

हनुमान है तुम्हारी,

दीनो के दाता तुमसे,

पहचान है हमारी,

पहुँचा सही ठिकाने,

पहुँचा सही ठिकाने,

अंजाम मेरे जैसा,

कोई नही जहाँ में,

धनवान मेरे जैसा ॥

दौलत बनाए बंगला,

पतवार ना बनाए,

माझी नहीं बिकाऊ,

माझी कहाँ से लाए,

समझो लगा किनारे,

समझो लगा किनारे,

नादान मेरे जैसा,

कोई नही जहाँ में,

धनवान मेरे जैसा ॥

‘बनवारी’ एक ही है,

धनवान मुझसे ज्यादा,

धोखा तो कर रहा हूँ,

कैसे करूँ इरादा,

धनवान बन सका ना,

धनवान बन सका ना,

हे राम तेरे जैसा,

कोई नही जहाँ में,

धनवान मेरे जैसा ॥

कोई नहीं जहाँ में,

धनवान मेरे जैसा,

दाता मिला गरीब को,

दाता मिला गरीब को,

हनुमान तेरे जैसा,

कोई नही जहाँ में,

॥ दोहा ॥

धनवान मेरे जैसा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।