कोई लाख करे चतुरायी

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॥ पावन पाठ ॥

कोई लाख करे चतुरायी,

करम का लेख मिटे ना रे भाई,

करम का लेख मिटे ना रे भाई ॥

जरा समझो इसकी सच्चाई रे,

करम का लेख मिटे ना रे भाई ॥

इस दुनिया में,

भाग्य के आगे,

चले ना किसी का उपाय,

कागद हो तो,

सब कोई बांचे,

करम ना बांचा जाए,

इस दिन इसी,

किस्मत के कारण,

वन को गए थे रघुराई रे,

करम का लेख मिटे ना रे भाई ॥

कोई लाख करे चतुरायी,

करम का लेख मिटे ना रे भाई,

करम का लेख मिटे ना रे भाई ॥

काहे मनवा धीरज खोता,

काहे तू नाहक रोए,

अपना सोचा कभी ना होता,

भाग्य करे तो होए,

चाहे हो राजा चाहे भिखारी,

ठोकर सभी ने यहाँ खायी रे,

करम का लेख मिटे ना रे भाई ॥

SantoKiVani Lyrics

कोई लाख करे चतुरायी,

करम का लेख मिटे ना रे भाई,

॥ दोहा ॥

करम का लेख मिटे ना रे भाई ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।