कितना सोणा है दरबार, भवानी तेरा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Mata Rani Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

कितना सोणा है दरबार,

भवानी तेरा ये सिणगार,

कितना सोणा है,

तेरा ये दरबार भवानी,

तेरा ये सिणगार,

कितना सोणा है,

ओ मैया तुमको,

किसने सजाया है,

तेरा सुंदर से सुंदर,

दरबार बनाया है ॥

कोई लाया लाल चुनरिया,

कोई लाया पैजनियां,

कोई बिंदिया कंगन लाया,

कोई मोतियन हार,

कितना प्यारा है,

कितना प्यारा है दरबार,

भवानी तेरा ये सिणगार,

कितना सोणा है,

ओ मैया तुमको,

किसने सजाया है,

तेरा सुंदर से सुंदर,

दरबार बनाया है ॥

सिंह सवारी माँ जगदम्बे,

तेरी शोभा अति प्यारी,

बलिहारी हुआ आज भक्त वो,

किया जिसने दीदार,

कितना प्यारा है,

कितना प्यारा है दरबार,

भवानी तेरा ये सिणगार,

कितना सोणा है,

ओ मैया तुमको,

किसने सजाया है,

तेरा सुंदर से सुंदर,

दरबार बनाया है ॥

जगराते में भजन भाव की,

पावन गंगा बहती है,

करे प्रार्थना ‘चोखानी’ भी,

लगाके जै जैकार,

कितना प्यारा है,

कितना प्यारा है दरबार,

भवानी तेरा ये सिणगार,

कितना सोणा है,

ओ मैया तुमको,

किसने सजाया है,

तेरा सुंदर से सुंदर,

दरबार बनाया है ॥

कितना सोणा है दरबार,

भवानी तेरा ये सिणगार,

कितना सोणा है,

तेरा ये दरबार भवानी,

तेरा ये सिणगार,

कितना सोणा है,

ओ मैया तुमको,

किसने सजाया है,

तेरा सुंदर से सुंदर,

दरबार बनाया है ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।