कितना रोई पार्वती, शिवनाथ के लिए

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

कितना रोई पार्वती,

शिवनाथ के लिए,

मैं तो प्राण भी तज दूंगी,

भोलेनाथ के लिए,

सबने कितना समझाया,

पर ना मानी महामाया ॥

जबसे हाँ जनम लिया था,

शिव को था अपना माना,

शिव का ही वरण करूँगी,

मन में था ये ही ठाना,

मैं कुछ भी कर दूंगी,

शिव के साथ के लिए,

मैं कुछ भी कर दूंगी,

शिव के साथ के लिए,

मैं तो प्राण भी तज दूंगी,

भोलेनाथ के लिए,

सबने कितना समझाया,

पर ना मानी महामाया ॥

वो औघड़ है वो योगी,

हिमाचल ने समझाया,

बड़ा तू दुख सहेगी,

मैना माँ ने बतलाया,

एक ना मानी फिर भी,

शिव के हाथ के लिए,

एक ना मानी फिर भी,

शिव के हाथ के लिए,

मैं तो प्राण भी तज दूंगी,

भोलेनाथ के लिए,

सबने कितना समझाया,

पर ना मानी महामाया ॥

सप्त ऋषियो ने आकर,

भी गौरा को समझाया,

पिए वो भंग धतूरा,

नाग को गले बिठाया,

और भी जागी श्रद्धा,

कृपा नाथ के लिए,

और भी जागी श्रद्धा,

कृपा नाथ के लिए,

मैं तो प्राण भी तज दूंगी,

भोलेनाथ के लिए,

सबने कितना समझाया,

पर ना मानी महामाया ॥

कितना रोई पार्वती,

शिवनाथ के लिए,

मैं तो प्राण भी तज दूंगी,

भोलेनाथ के लिए,

सबने कितना समझाया,

॥ दोहा ॥

पर ना मानी महामाया ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।