किसलिए आस छोड़े कभी ना कभी

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Shri Ram Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

किस लिए आस छोड़े कभी ना कभी,

क्षण विरह के मिलन में बदल जाएंगे ।

नाथ कब तक रहेंगे कड़े एक दिन,

देखकर प्रेम आंसू पिघल जाएंगे ॥

॥ किस लिए आंस छोड़ें..॥

सबरी केवट जटायु अहिल्याजी के,

पास पहुंचे स्वयं छोड़कर के अवध ।

ये हैं घटनाएं सच तो भरोसा हमें,

खुद-ब-खुद आप आकर के मिल जाएंगे ॥

॥ किस लिए आंस छोड़ें..॥

दर्श देने को रघुवर जी आएंगे जब,

हम ना मानेंगे अपनी चलाये बिना ।

जाने देंगे ना वापिस किसी शर्त पर,

बस कमल पद पकड़कर मचल जाएंगे ॥

॥ किस लिए आंस छोड़ें..॥

फिर सुनाएंगे खोटी-खरी आपको,

और पूछेंगे देरी लगाई कहां?

फिर निवेदन करेंगे न छोड़ो हमें,

प्रभु की जूठन प्रसादी पे पल जाएंगे ॥

॥ किस लिए आंस छोड़ें..॥

स्वप्न साकार होगा तभी राम जी,

"जन" पे हो जाए थोड़ी कृपा आपकी ।

पूर्ण कर दो मनोरथ यह "राजेश" का,

जाने कब प्राण तन से निकल जाएंगे ॥

किसलिए आस छोड़ें, कभी ना कभी,

॥ दोहा ॥

क्षण विरह के मिलन में बदल जाएंगे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।