॥ दोहा ॥
दीन अनाथ जानि मोहे, कीजो कृपा निधान।
चित्र विचित्र के हिय में बसो, वृषभानु की शान॥
॥ चौपाई ॥
किशोरी राधे सुन लो हमारी अरदास।
हम तो खड़े हैं श्यामा तेरे ही द्वार॥
किशोरी राधे सुन लो हमारी अरदास॥
ना कोई साधन ना कोई बल है।
आँखों में केवल विरह का जल है॥
अपने चरणन का दे दो हमें वास।
किशोरी राधे सुन लो हमारी अरदास॥
बरसाने की तुम हो ठकुरानी।
कान्हा जिनकी भरते हैं पानी॥
पूरण कर दो मन की ये प्यास।
किशोरी राधे सुन लो हमारी अरदास॥
चित्र विचित्र कहे लाडली प्यारी।
तुम पर वारे कुंजबिहारी॥
टूटे कभी न ये प्रीत की आस।
किशोरी राधे सुन लो हमारी अरदास॥
॥ दोहा ॥
श्री राधे वृषभानु दुलारी, करुणामयी सरकार।
चित्र विचित्र पुकारत निसदिन, जय जय सुखकार॥