कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि,

री लीला गुदवाय लो प्यारी ।

दृगन पै लिख दे दीनदयाल

नासिका पै लिख दे नन्दलाल

कपोलन पै लिख दे गोपाल

माथे लिख दे, मोहन लाल

श्रवनन पै लिख सांवरो, अधरन आनंदकंद,

ठोड़ी पै ठाकुर लिखो, गले में गोकुलचन्द ।

छाती पै लिख छैल, बाँहन पै लिख दे बनवारी ।

कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि,

री लीला गुदवाय लो प्यारी ।

हाथन पै हलधर जी को भईया लिख ,

संग संग तू आनंद-करैया लिख

उंगरिन पै प्यारो कृष्ण कन्हैया लिख

कहूं कहूं वृन्दावन बंसी को बजैया लिख

पेट पै लिख दे परमानन्द

नाभि पै लिख दे तू नन्दनन्द

पिण्डरी पै लिख दे घनश्याम

चरण पै चितचोर को नाम

रोम-रोम में लिख दे मेरो सांवरो गिरिधारी ।

कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि,

री लीला गुदवाय लो प्यारी ।

सखी देखत सब रह गयी कौन प्रेम को फंद

बिसे बिस कोई और नहीं ये छलिया ढोटा नन्द

अंगिया में देखि कसी मुरली परम रसाल

प्यारो प्यारो कह कह हिय लायो नंदलाल ।

कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि,

री लीला गुदवाय लो प्यारी ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।