खाटू नगरी अति भली, सोहे श्याम दरबार।
जो ध्यावे मन शुद्ध सों, उतरे भव से पार॥
खाटू वाले श्याम धणी मेरी नैया पार लगा देना।
बीच भंवर में अटकी नैया, इसको पार लगा देना॥
खाटू वाले श्याम धणी॥
तूने लाखों तारे बाबा, मेरी भी बारी आई।
लाज बचा ले इस सेवक की, सुन ले मेरी दुहाई॥
हाथ जोड़कर खड़ा द्वार पे, दर्शन मुझे करा देना।
खाटू वाले श्याम धणी मेरी नैया पार लगा देना॥
सच्चे मन से जो भी ध्यावे, मनवांछित फल पावे।
दुख संताप मिटे सब उसके, सुख संपत्ति घर आवे॥
अपनी कृपा की अमृत वर्षा, मुझ पर भी बरसा देना।
खाटू वाले श्याम धणी मेरी नैया पार लगा देना॥
संजय मित्तल गाए आरती, खाटू के सरकार।
तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ, वंदन बारंबार॥
खाटू वाले श्याम धणी मेरी नैया पार लगा देना॥
नीले के असवार की, महिमा है अनमोल।
जय श्री श्याम जय श्री श्याम, अंतरपट से बोल॥