खाटू वाले श्याम धणी मेरी नैया पार लगा देना

संजय मित्तल
अन्य भजन भजन संजय मित्तल
॥ दोहा ॥

खाटू नगरी अति भली, सोहे श्याम दरबार।
जो ध्यावे मन शुद्ध सों, उतरे भव से पार॥

॥ चौपाई ॥

खाटू वाले श्याम धणी मेरी नैया पार लगा देना।
बीच भंवर में अटकी नैया, इसको पार लगा देना॥
खाटू वाले श्याम धणी॥

तूने लाखों तारे बाबा, मेरी भी बारी आई।
लाज बचा ले इस सेवक की, सुन ले मेरी दुहाई॥
हाथ जोड़कर खड़ा द्वार पे, दर्शन मुझे करा देना।
खाटू वाले श्याम धणी मेरी नैया पार लगा देना॥

सच्चे मन से जो भी ध्यावे, मनवांछित फल पावे।
दुख संताप मिटे सब उसके, सुख संपत्ति घर आवे॥
अपनी कृपा की अमृत वर्षा, मुझ पर भी बरसा देना।
खाटू वाले श्याम धणी मेरी नैया पार लगा देना॥

संजय मित्तल गाए आरती, खाटू के सरकार।
तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ, वंदन बारंबार॥
खाटू वाले श्याम धणी मेरी नैया पार लगा देना॥

॥ दोहा ॥

नीले के असवार की, महिमा है अनमोल।
जय श्री श्याम जय श्री श्याम, अंतरपट से बोल॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

खाटू वाले श्याम धणी के श्री चरणों में जीवन की डगमगाती नैया को किनारे लगाने की प्रार्थना का यह अमर भजन हर श्याम प्रेमी के हृदय में गूँजता है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।