खाटू वाले श्याम बिहारी कलयुग के अवतारी

पूजा सखी
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॥ दोहा ॥

कलयुग के अवतारी बाबा, शीश के दानी श्याम।
पूजा सखी के प्राणधन, पूरण कीजो काम॥

॥ चौपाई ॥

खाटू वाले श्याम बिहारी, कलयुग के अवतारी।
तेरी महिमा सब जग से न्यारी न्यारी॥
खाटू वाले श्याम बिहारी॥

शीश का दान दिया तूने प्रभु, लखदाता कहलाया।
हारे हुए का साथ निभाकर, अपना मान बढ़ाया॥
नीले घोड़े की असवारी, लागे अति प्यारी।
खाटू वाले श्याम बिहारी॥

हाथ में मोरछड़ी विराजे, संकट दूर भगावे।
जो भी तेरे दर पे आवे, मनवांछित फल पावे॥
तेरी चौखट पे शीश झुकावे, दुनिया ये सारी।
खाटू वाले श्याम बिहारी॥

पूजा सखी कहे मेरे बाबा, लाज हमारी रखना।
अपने चरणों में मुझको, सदा ही वास देना॥
हारे का सहारा तू ही, जय जय लखदातारी।
खाटू वाले श्याम बिहारी, कलयुग के अवतारी॥

॥ दोहा ॥

शीश दान महादानी, लखदातार सुजान।
पूजा सखी वंदन करे, जय जय कृपा निधान॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

कलयुग के साक्षात अवतारी एवं शीश के दानी बाबा श्याम की अगाध महिमा का गुणगान।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।