आरती देवी कात्यायनी

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती Aarti Aarti Devi Katyayani Aarti
॥ दोहा ॥

॥ आरती देवी कात्यायनी जी की ॥

॥ चौपाई ॥

जय जय अम्बे जय कात्यायनी।जय जग माता जग की महारानी॥

बैजनाथ स्थान तुम्हारा।वहावर दाती नाम पुकारा॥

कई नाम है कई धाम है।यह स्थान भी तो सुखधाम है॥

हर मन्दिर में ज्योत तुम्हारी।कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥

हर जगह उत्सव होते रहते।हर मन्दिर में भगत है कहते॥

कत्यानी रक्षक काया की।ग्रंथि काटे मोह माया की॥

संतो की वाणी झूठे मोह से छुडाने वाली।अपना नाम जपाने वाली॥

बृहस्पतिवार को पूजा करिए।ध्यान कात्यानी का धरिये॥

हर संकट को दूर करेगी।भंडारे भरपूर करेगी॥

॥ दोहा ॥

जो भी माँ को भक्त पुकारे।कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

आरती देवी कात्यायनी के लिरिक्स / बोल हिन्दी और अंग्रेज़ी में | Read Aarti Devi Katyayani Ke Lyrics Hindi Main Jane

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।