॥ दोहा ॥
करुणा सिंधु लाडली, दीनानाथ सहाय।
इंद्रेश शरण में आ पड़ा, सब संताप नशाय॥
॥ चौपाई ॥
करुणा की मूरत कृपा की हो सागर।
लाडली राधे वृषभानु की आगर॥
करुणा की मूरत कृपा की हो सागर॥
तुम सा दयालु कोई जग में न देखा।
बदल देती हो तुम कर्मों की रेखा॥
अधम उधारण नाम तिहारो।
करुणा की मूरत कृपा की हो सागर॥
अवगुण मेरे चित ना धरो तुम।
अपनी दया की वर्षा करो तुम॥
चरणों की दासी बना लो कन्हैया।
करुणा की मूरत कृपा की हो सागर॥
इंद्रेश के मन मंदिर में बसियो।
सदा प्रेम सुधा रस में रसियो॥
राधा नाम जय जय बरसाने।
करुणा की मूरत कृपा की हो सागर॥
॥ दोहा ॥
श्री राधे करुणा निधे, राखो निज पद छाँव।
इंद्रेश निरंतर जपत है, तेरो पावन नाँव॥