कर किरपा तेरे गुण गावा - शब्द कीर्तन

गुरु नानक देव जी
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॥ पावन पाठ ॥

कर किरपा तेरे गुण गाँवा,

नानक नाम जपत सुख पाँवा,

तू वड दाता अन्तर्यामी,

सब मे हैं रविया पुरण प्रभ स्वामी,

कर किरपा तेरे गुण गाँवा

मेरे प्रभ प्रीतम प्राण अधारा,

हॅव सूंड़-सूंड़ जीवा नाम तुमारा,

कर किरपा तेरे गुण गाँवा

तेरी शरण मेरे सतगुुरु मेरे पूरे,

मन निर्मल होये संता दूरे,

कर किरपा तेरे गुण गाँवा

चरण कमल हिर्दय उरधारे,

तेरे दर्शन कऊ जाई बल्हारे,

कर किरपा तेरे गुण गाँवा

कर कृपा तेरे गुण गावा,

नानक नाम जपत सुख पावा,

कर किरपा तेरे गुण गाँवा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।