कन्हैया ले चल परली पार

संजय मित्तल
श्री कृष्ण भजन भजन संजय मित्तल
॥ दोहा ॥

भवसागर की धार में, डोले मेरी नाव।
पकड़ो नैया की पतवार, हे श्यामल घनश्याम॥

॥ चौपाई ॥

कन्हैया ले चल परली पार, कन्हैया ले चल परली पार।
जहाँ बिराजे राधा रानी, अलबेला संसार॥
कन्हैया ले चल परली पार॥

चारों तरफ है घोर अँधेरा, सूझे ना किनारा।
डगमग डोले जीवन नैया, तुम ही एक सहारा॥
छोड़ दिया जग सारा प्यारे, पकड़ लिया दरबार।
कन्हैया ले चल परली पार॥

ना कोई संगी ना कोई साथी, ना कोई अपना मीत।
तू ही मेरा मांझी सांवरिया, तू ही मेरा गीत॥
पार लगा दो नैया मेरी, सुन लो करुण पुकार।
कन्हैया ले चल परली पार॥

संजय मित्तल गाए महिमा, खाटू के सरकार।
दीन दुखी के तुम रखवाले, करते बेड़ा पार॥
कन्हैया ले चल परली पार॥

॥ दोहा ॥

श्री श्याम शरण में जो रहे, मिटे सकल संताप।
संजय मित्तल गावती, कटे जनम के पाप॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

संजय मित्तल जी द्वारा भावपूर्ण स्वर में गाया गया यह अत्यंत प्रसिद्ध भजन जीव की भवसागर पार उतरने की आर्त पुकार है, जिसमें प्रभु श्री कृष्ण और खाटू श्याम जी को जीवन रूपी नैया का मांझी बनाया गया है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।