कन्हैया ले चल परली पार जहां विराजे राधा रानी

देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण भजन भजन देवी चित्रलेखा
॥ दोहा ॥

यमुना तीरे सांवरिया, मुरली मधुर बजाय।
देवी चित्रलेखा गावती, नैया पार लगाय॥

॥ चौपाई ॥

कन्हैया ले चल परली पार, जहां विराजे राधा रानी।
मेरी नैया के तुम हो खिवैया, सुन लो करुण कहानी॥
कन्हैया ले चल परली पार॥

इस पार बड़ा ही अंधेरा है, संकट ने मुझको घेरा है।
उस पार प्रेम का डेरा है, जहां रूप सलोना तेरा है॥
तू ही तो है मेरा तारणहार, जहां विराजे राधा रानी।
कन्हैया ले चल परली पार॥

लहरें जब नैया डगमगाएँ, मन में जब संकट उमड़ आए।
तेरा ही नाम पुकारूँ मैं, तू ही किनारे पहुंचाए॥
दीन दुखी की सुन ले पुकार, जहां विराजे राधा रानी।
कन्हैया ले चल परली पार॥

देवी चित्रलेखा कहे ओ कान्हा, मुझको चरणों में बसाना।
बरसाने की पावन गलियों में, इक छोटा सा घर दिलाना॥
कर दो अब तो बेड़ा पार, जहां विराजे राधा रानी।
कन्हैया ले चल परली पार॥

॥ दोहा ॥

भवसागर की धार से, कान्हा लेहु उबार।
देवी चित्रलेखा वंदन करे, जय जय नन्दकुमार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

संसार के दुख-दर्द से पार होकर श्री राधा रानी के पावन धाम बरसाने में स्थान पाने की करुण प्रार्थना।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।