कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे

संजय मित्तल
श्री कृष्ण भजन भजन संजय मित्तल
॥ दोहा ॥

कन्हैया तेरे प्रेम में, सुध बुध बिसरी मोय।
रोम रोम में रम रहे, दूजा ना कोई होय॥

॥ चौपाई ॥

कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे, लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे।
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे॥

कहीं तो मिलेंगे वो बांके बिहारी, उन्हीं के चरण चित्त लगाया करेंगे।
बनाकर हृदय में प्रेमामृत मंदिर, छवि उनकी पलकों में बसाया करेंगे॥
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे॥

ना भूख होगी ना प्यास होगी, बस दर्शन की मन में आस होगी।
बजाएंगे बंसी वो कदंब की छैयां, वहीँ बैठ हम दिन गुजारा करेंगे॥
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे॥

संजय मित्तल गावे मोहन की लीला, रसीला है जिनका ये रूप सजीला।
चरणों में शीश झुकाया करेंगे, कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे॥

॥ दोहा ॥

राधे कृष्ण बोल मुख से, तर जाए संसार।
कन्हैया के प्रेम बिन, सूना सब व्यापार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

ब्रज भूमि और वृंदावन की कुंज गलियों में श्री कृष्ण के अनन्य प्रेम में लीन होकर जीवन बिताने का यह पारंपरिक दिव्य पद है जिसे संजय मित्तल जी ने अत्यंत मधुरता से गाया है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।