कन्हैया तेरे प्रेम में, सुध बुध बिसरी मोय।
रोम रोम में रम रहे, दूजा ना कोई होय॥
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे, लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे।
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे॥
कहीं तो मिलेंगे वो बांके बिहारी, उन्हीं के चरण चित्त लगाया करेंगे।
बनाकर हृदय में प्रेमामृत मंदिर, छवि उनकी पलकों में बसाया करेंगे॥
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे॥
ना भूख होगी ना प्यास होगी, बस दर्शन की मन में आस होगी।
बजाएंगे बंसी वो कदंब की छैयां, वहीँ बैठ हम दिन गुजारा करेंगे॥
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे॥
संजय मित्तल गावे मोहन की लीला, रसीला है जिनका ये रूप सजीला।
चरणों में शीश झुकाया करेंगे, कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे॥
राधे कृष्ण बोल मुख से, तर जाए संसार।
कन्हैया के प्रेम बिन, सूना सब व्यापार॥