॥ दोहा ॥
ब्रज की लता पता विषे, बसत अलौकिक श्याम।
इंद्रेश मन मगन रहे, जपत निरंतर नाम॥
॥ चौपाई ॥
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे।
लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे॥
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे॥
कभी तो मिलोगे वो बांके बिहारी।
इन्हीं आंसुओं से चरण पखारेंगे॥
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे॥
बना करके मन को प्रेम की वीणा।
तेरे ही तराने सुधारा करेंगे॥
लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे॥
इंद्रेश कहे छोड़ संसार सारा।
तेरी ही शरण में गुजारा करेंगे॥
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे।
लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे॥
॥ दोहा ॥
ब्रज रज में लोटन मिले, नयनों सांवरो रूप।
इंद्रेश जीवन सफल भयो, पायो प्रेम अनूप॥