कान्हा तेरे नैन कजरारे मोहन तेरे नैन कजरारे

इंद्रेश जी महाराज
श्री कृष्ण भजन भजन इंद्रेश जी महाराज
॥ दोहा ॥

नैनन में कजरा सजो, तिरछी चितवन धार।
इंद्रेश बलिहारी गया, मोहन रूप उदार॥

॥ चौपाई ॥

कान्हा तेरे नैन कजरारे, मोहन तेरे नैन कजरारे।
नैनन में जादू कर डारे, मोहन तेरे नैन कजरारे॥
कान्हा तेरे नैन कजरारे॥

तिरछी नज़रिया जब से मारी, सुधबुध भूली ब्रज की नारी।
घायल कर गए रूप तिहारे, मोहन तेरे नैन कजरारे॥
कान्हा तेरे नैन कजरारे॥

झांकी देखन जो भी आवे, कान्हा का ही हो जावे।
दर्शन देके भाग संवारे, मोहन तेरे नैन कजरारे॥
कान्हा तेरे नैन कजरारे॥

इंद्रेश कहे सांवरिया प्यारे, हम तो दास हैं तुम्हारे।
चरणन में राखो बनवारी, मोहन तेरे नैन कजरारे॥
कान्हा तेरे नैन कजरारे, मोहन तेरे नैन कजरारे॥

॥ दोहा ॥

कजरारे नैनन विषे, अमृत रस भरपूर।
इंद्रेश प्रभु के ध्यान से, संकट होवत दूर॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री कृष्ण के कजरारे, मतवारे एवं सम्मोहक नयनों की दिव्य छटा का मधुर गान।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।