॥ दोहा ॥
नैनन में कजरा सजो, तिरछी चितवन धार।
इंद्रेश बलिहारी गया, मोहन रूप उदार॥
॥ चौपाई ॥
कान्हा तेरे नैन कजरारे, मोहन तेरे नैन कजरारे।
नैनन में जादू कर डारे, मोहन तेरे नैन कजरारे॥
कान्हा तेरे नैन कजरारे॥
तिरछी नज़रिया जब से मारी, सुधबुध भूली ब्रज की नारी।
घायल कर गए रूप तिहारे, मोहन तेरे नैन कजरारे॥
कान्हा तेरे नैन कजरारे॥
झांकी देखन जो भी आवे, कान्हा का ही हो जावे।
दर्शन देके भाग संवारे, मोहन तेरे नैन कजरारे॥
कान्हा तेरे नैन कजरारे॥
इंद्रेश कहे सांवरिया प्यारे, हम तो दास हैं तुम्हारे।
चरणन में राखो बनवारी, मोहन तेरे नैन कजरारे॥
कान्हा तेरे नैन कजरारे, मोहन तेरे नैन कजरारे॥
॥ दोहा ॥
कजरारे नैनन विषे, अमृत रस भरपूर।
इंद्रेश प्रभु के ध्यान से, संकट होवत दूर॥