कान्हा रे थोड़ा सा प्यार दे चरणों में थोड़ा सा स्थान दे

मृदुल कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण भजन भजन मृदुल कृष्ण शास्त्री
॥ दोहा ॥

प्यासा हूँ तेरे प्यार का, बांकेबिहारी श्याम।
मृदुल कृष्ण के हृदय में, बसो नित्य सुखधाम॥

॥ चौपाई ॥

कान्हा रे थोड़ा सा प्यार दे।
चरणों में थोड़ा सा स्थान दे॥
दुनिया से मैं तो हारा कन्हैया।
मेरी भी नैया पार दे॥
कान्हा रे थोड़ा सा प्यार दे॥

दर पे खड़ा हूँ तेरे सवाली बनके।
नैना बहाएं आँसू कन्हैया सुनके॥
अपनी कृपा का दान दे।
चरणों में थोड़ा सा स्थान दे॥

तूने तो कितनों के कष्ट मिटाए।
दीनों को मोहन गले से लगाए॥
मुझको भी जीवन का वरदान दे।
चरणों में थोड़ा सा स्थान दे॥

मृदुल कृष्ण की करुण पुकार सुनो।
मेरे भी अवगुण को मत तुम गिनो॥
भक्ति का निर्मल ज्ञान दे।
कान्हा रे थोड़ा सा प्यार दे॥

॥ दोहा ॥

कृपा दृष्टि जब तुम करो, दूर होय सब संताप।
मृदुल कृष्ण गावे सदा, मिटे जन्म के पाप॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

संसार से निराश भक्त की ठाकुर जी से अहैतुकी प्रेम और चरणों में तनिक स्थान पाने की आर्त पुकार।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।