॥ दोहा ॥
प्यासा हूँ तेरे प्यार का, बांकेबिहारी श्याम।
मृदुल कृष्ण के हृदय में, बसो नित्य सुखधाम॥
॥ चौपाई ॥
कान्हा रे थोड़ा सा प्यार दे।
चरणों में थोड़ा सा स्थान दे॥
दुनिया से मैं तो हारा कन्हैया।
मेरी भी नैया पार दे॥
कान्हा रे थोड़ा सा प्यार दे॥
दर पे खड़ा हूँ तेरे सवाली बनके।
नैना बहाएं आँसू कन्हैया सुनके॥
अपनी कृपा का दान दे।
चरणों में थोड़ा सा स्थान दे॥
तूने तो कितनों के कष्ट मिटाए।
दीनों को मोहन गले से लगाए॥
मुझको भी जीवन का वरदान दे।
चरणों में थोड़ा सा स्थान दे॥
मृदुल कृष्ण की करुण पुकार सुनो।
मेरे भी अवगुण को मत तुम गिनो॥
भक्ति का निर्मल ज्ञान दे।
कान्हा रे थोड़ा सा प्यार दे॥
॥ दोहा ॥
कृपा दृष्टि जब तुम करो, दूर होय सब संताप।
मृदुल कृष्ण गावे सदा, मिटे जन्म के पाप॥