कान्हा मेरी राखी का, तुझे कर्ज चुकाना है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Vishnu Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा मेरी राखी का,

तुझे कर्ज चुकाना है,

जन्मों जनम तक ये,

जन्मों जनम तक ये,

अब रिश्ता निभाना है,

कान्हां मेरी राखी का,

तुझे कर्ज चुकाना है ॥

बैठा बैठा क्या सोचे,

पकड़ ले कलैया रे,

झूठे जग के झमेले में,

खो न जाऊं मैं भैया रे,

बनके खिवैया तुझे,

बनके खिवैया तुझे,

परली पार ले जाना है,

जन्मों जनम तक ये,

अब रिश्ता निभाना है,

कान्हां मेरी राखी का,

तुझे कर्ज चुकाना है ॥

रेशम की डोरी का,

मान तुझे रखना है,

मैं ना कहूं कुछ भी,

तुझको समझना है,

भूल से भी भूल मुझसे,

भूल से भी भूल मुझसे,

तुझको ना कराना है,

जन्मों जनम तक ये,

अब रिश्ता निभाना है,

कान्हां मेरी राखी का,

तुझे कर्ज चुकाना है ॥

जिस राह पे ‘अर्चू’ चले,

वो राह अनजानी है,

थामकर उंगली मेरी,

तुझे राह दिखानी है,

बनके उजाला तुझे,

बनके उजाला तुझे,

ये अँधेरा मिटाना है,

जन्मों जनम तक ये,

अब रिश्ता निभाना है,

कान्हां मेरी राखी का,

तुझे कर्ज चुकाना है ॥

कान्हा मेरी राखी का,

तुझे कर्ज चुकाना है,

जन्मों जनम तक ये,

जन्मों जनम तक ये,

अब रिश्ता निभाना है,

कान्हां मेरी राखी का,

॥ दोहा ॥

तुझे कर्ज चुकाना है ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।