कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिरी सुमिरी नर उतरहिं पारा।
खाटू में बैठा सांवरो, करत भक्त निस्तारा॥
कलयुग का राजा सांवरिया हमारा, तीनों लोकों में इसका नज़ारा।
कलयुग का राजा सांवरिया हमारा॥
द्वार पे इसके जो भी आया, खाली झोली भर के ले जाया।
हारे हुए का ये बनता सहारा, जग में गूँजे इसका जयकारा॥
दीन दुखी का सच्चा सहारा, कलयुग का राजा सांवरिया हमारा॥
मोरछड़ी का झाड़ा लागे, सोया हुआ मुकद्दर जागे।
भूत प्रेत सब दूर भगाए, संकट सारे पल में मिटाए॥
कैसा ये दानी कैसा ये प्यारा, कलयुग का राजा सांवरिया हमारा॥
कन्हैया मित्तल गाए तराने, खाटू वाले की महिमा जाने।
जब तक सांस रहेगी तन में, श्याम नाम ही रहेगा मन में॥
कलयुग का राजा सांवरिया हमारा, तीनों लोकों में इसका नज़ारा॥
कलयुग के अवतारी तुम, जय हो लखदातार।
कन्हैया मित्तल वंदना, तारो हे करतार॥