कलयुग का राजा सांवरिया हमारा

कन्हैया मित्तल
अन्य भजन भजन कन्हैया मित्तल
॥ दोहा ॥

कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिरी सुमिरी नर उतरहिं पारा।
खाटू में बैठा सांवरो, करत भक्त निस्तारा॥

॥ चौपाई ॥

कलयुग का राजा सांवरिया हमारा, तीनों लोकों में इसका नज़ारा।
कलयुग का राजा सांवरिया हमारा॥

द्वार पे इसके जो भी आया, खाली झोली भर के ले जाया।
हारे हुए का ये बनता सहारा, जग में गूँजे इसका जयकारा॥
दीन दुखी का सच्चा सहारा, कलयुग का राजा सांवरिया हमारा॥

मोरछड़ी का झाड़ा लागे, सोया हुआ मुकद्दर जागे।
भूत प्रेत सब दूर भगाए, संकट सारे पल में मिटाए॥
कैसा ये दानी कैसा ये प्यारा, कलयुग का राजा सांवरिया हमारा॥

कन्हैया मित्तल गाए तराने, खाटू वाले की महिमा जाने।
जब तक सांस रहेगी तन में, श्याम नाम ही रहेगा मन में॥
कलयुग का राजा सांवरिया हमारा, तीनों लोकों में इसका नज़ारा॥

॥ दोहा ॥

कलयुग के अवतारी तुम, जय हो लखदातार।
कन्हैया मित्तल वंदना, तारो हे करतार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

कलयुग में भगवान खाटू श्याम जी को एकमात्र प्रत्यक्ष तारणहार और राजाधिराज मानकर उनकी छत्रछाया में रहने का गौरवगान।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।