॥ दोहा ॥
झीनी झीनी बीनी चदरिया।
काहे कै ताना, काहे कै भरनी, कौन तार से बीनी चदरिया॥
॥ चौपाई ॥
इड़ा पिंगला ताना भरनी, सुखमन तार से बीनी चदरिया।
आठ कंवल दल चरखा डोलै, पांच तत्व गुन तीनी चदरिया॥
झीनी झीनी बीनी चदरिया...
साईं को सियत मास दस लागे, ठोक-ठोक कै बीनी चदरिया।
सो चादर सुर नर मुनि ओढ़ी, ओढ़ि कै मैली कीनी चदरिया॥
झीनी झीनी बीनी चदरिया...
दास कबीर जतन करि ओढ़ी, ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया।
झीनी झीनी बीनी चदरिया...
॥ दोहा ॥
ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया, दास कबीर जतन करि ओढ़ी।
झीनी झीनी बीनी चदरिया॥