कभी रूठना ना मुझसे मेरे सांवरे सलोने

चित्र विचित्र जी महाराज
श्री कृष्ण भजन भजन चित्र विचित्र जी
॥ दोहा ॥

रूठे जग तो कुछ नहीं, कान्हा रूठे प्राण।
चित्र विचित्र पुकारसी, राखो मेरो मान॥

॥ चौपाई ॥

कभी रूठना ना मुझसे, मेरे सांवरे सलोने।
तेरे बिना ये दिल कहीं, लगता नहीं है कोने॥
कभी रूठना ना मुझसे॥

दुनिया अगर रूठे तो, कोई बात नहीं है।
पर तेरी जुदाई तो, सही जाती नहीं है॥
तेरी याद में ही नैना, निसदिन रहें रोने।
कभी रूठना ना मुझसे, मेरे सांवरे सलोने॥

गलती जो हो जाए प्रभु, क्षमा कर देना।
अपनी दया से मेरी, झोली भर देना॥
तेरे प्यार के मोती, मुझको नहीं खोने।
कभी रूठना ना मुझसे, मेरे सांवरे सलोने॥

चित्र विचित्र कहे मोहन, तू ही मेरी जान है।
तेरे ही चरणों में, मेरा जहान है॥
सदा साथ निभाना, मेरे यार दिलदार सलोने।
कभी रूठना ना मुझसे, मेरे सांवरे सलोने॥

॥ दोहा ॥

सांवरिया सुकुमार प्रभु, तोड़े न प्रीत की डोर।
चित्र विचित्र के प्राण बसे, श्री नवल किशोर॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

चित्र विचित्र जी महाराज का अत्यंत मार्मिक भजन—भक्त कहता है कि चाहे सारा संसार रूठ जाए, पर मेरा कन्हैया मुझसे कभी न रूठे।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।