कभी राम बनके कभी श्याम बनके चले आना प्रभुजी चले आना

मृदुल कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण भजन भजन मृदुल कृष्ण शास्त्री
॥ दोहा ॥

एकहि रूप अनेक धर, लीला रची अपार।
मृदुल कृष्ण अंतर बसे, दीनबंधु करतार॥

॥ चौपाई ॥

कभी राम बनके कभी श्याम बनके।
चले आना प्रभुजी चले आना॥
कभी राम बनके कभी श्याम बनके॥

तुम राम रूप में आना, सीता साथ लेके आना।
धनुष हाथ लेके, बाण हाथ लेके चले आना॥
कभी राम बनके कभी श्याम बनके॥

तुम श्याम रूप में आना, राधा साथ लेके आना।
मुरली हाथ लेके, मुकुट माथ लेके चले आना॥
कभी राम बनके कभी श्याम बनके॥

तुम शिव के रूप में आना, गौरा साथ लेके आना।
डमरू हाथ लेके, त्रिशूल हाथ लेके चले आना॥
कभी राम बनके कभी श्याम बनके॥

मृदुल कृष्ण पुकारे, मन के मंदिर में आना।
प्रेम का दीप जला के, भक्ति रस बरसाना॥
चले आना प्रभुजी चले आना॥

॥ दोहा ॥

सर्व रूप में तू रमा, घट घट वासी ईश।
मृदुल कृष्ण गावे सदा, चरणों नावे शीश॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

प्रभु के विभिन्न दिव्य अवतारों—श्री राम, श्री कृष्ण और देवाधिदेव महादेव के स्वरूपों में हृदय मंदिर में पधारने का आत्मीय आह्वान।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।