कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा

देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण भजन भजन देवी चित्रलेखा
॥ दोहा ॥

माता पिता की सेवा ही, तीर्थ चारों धाम।
देवी चित्रलेखा गावती, सतकर्म ही काम॥

॥ चौपाई ॥

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं, बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा।
कभी भूखे को भोजन कराया नहीं, बाद छप्पन भोग लगाने से क्या फायदा॥

गंगा नहाने से क्या फल मिले, जब मन का मैल ना धुला।
तीरथों में भटकने से क्या फायदा, जब मात-पिता को ना पूजा॥
घर के मंदिर में दिया जलाया नहीं, बाहर ज्योति जगाने से क्या फायदा॥

दीन दुखी को गले से लगाया नहीं, सदा नफरत के बीज बोते रहे।
जब वक्त था नेकी कमाने का, पापों की चादर ओढ़ते रहे॥
अब पछताए क्या होत है, जब चिड़िया चुग गई खेत को फायदा॥

देवी चित्रलेखा कहे मानुष जनम, मिला है तुम्हें परोपकार को।
सच्ची भक्ति वही जो मिटा दे, जगत के हर एक संताप को॥
प्रेम की गंगा बहाओ सदा, तभी प्रभु चरणों का मिलेगा फायदा॥

॥ दोहा ॥

परोपकार ही धर्म है, दया धर्म का मूल।
देवी चित्रलेखा वंदन करे, मिटे अविद्या शूल॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

पूज्य देवी चित्रलेखा जी द्वारा कथाओं में गाया जाने वाला परम प्रेरक जीवन-बोध भजन—जीवित अवस्था में माता-पिता, भूखे और प्यासे की सेवा ही वास्तविक धर्म है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।