कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं (बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा)

कुमार विशु / पारंपरिक चेता Hub
अन्य भजन भजन चेतावनी
॥ दोहा ॥

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं, बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा।
कभी गिरते हुए को उठाया नहीं, बाद आँसू बहाने से क्या फायदा॥

॥ चौपाई ॥

मैं तो मंदिर गया, पूजा आरती की।
पूजा करते हुए ये ख्याल आ गया॥
कभी भूखे को भोजन कराया नहीं, बाद छप्पन भोग लगाने से क्या फायदा।
कभी प्यासे को पानी...

गंगा नहाने से तन तो धुल जाएगा।
मन का मैल कैसे धुल पाएगा॥
माता-पिता की सेवा की नहीं, तीरथ धाम जाने से क्या फायदा।
कभी प्यासे को पानी...

जिसने दुःख में किसी का सहारा दिया।
उसने ही प्रभु का सच्चा दर्शन किया॥
दीन-दुखियों की सेवा जो करता नहीं, मंदिर शीश नवाने से क्या फायदा।
कभी प्यासे को पानी...

॥ दोहा ॥

नर सेवा ही नारायण सेवा है।
सच्चा धर्म वही है जो जीते जी काम आए॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

कर्मकांड और दिखावे से ऊपर उठकर जीते-जी माता-पिता की सेवा, भूखों को अन्न और प्यासों को जल पिलाने को सर्वोच्च धर्म बताने वाला चेतावनी भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।