कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं, बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा।
कभी गिरते हुए को उठाया नहीं, बाद आँसू बहाने से क्या फायदा॥
मैं तो मंदिर गया, पूजा आरती की।
पूजा करते हुए ये ख्याल आ गया॥
कभी भूखे को भोजन कराया नहीं, बाद छप्पन भोग लगाने से क्या फायदा।
कभी प्यासे को पानी...
गंगा नहाने से तन तो धुल जाएगा।
मन का मैल कैसे धुल पाएगा॥
माता-पिता की सेवा की नहीं, तीरथ धाम जाने से क्या फायदा।
कभी प्यासे को पानी...
जिसने दुःख में किसी का सहारा दिया।
उसने ही प्रभु का सच्चा दर्शन किया॥
दीन-दुखियों की सेवा जो करता नहीं, मंदिर शीश नवाने से क्या फायदा।
कभी प्यासे को पानी...
नर सेवा ही नारायण सेवा है।
सच्चा धर्म वही है जो जीते जी काम आए॥