कभी-कभी भक्ति करने को मन नहीं करता? - प्रेरक कहानी

संत तुलसीदास
श्री राम कथा Prerak-kahani Shri Ram Prerak-kahani
॥ पावन पाठ ॥

एक बार तुलसीदास जी से एक भक्त ने पूछा: कभी-कभी भक्ति करने को मन नहीं करता फिर भी नाम जपने के लिये बैठ जाते है, क्या उसका भी कोई फल मिलता है?

तुलसी दास जी ने मुस्करा कर कहा:

तुलसी मेरे राम को, रीझ भजो या खीज।

भौम पड़ा जामे सभी, उल्टा सीधा बीज॥

अर्थात्: भूमि में जब बीज बोये जाते हैं तो यह नहीं देखा जाता कि बीज उल्टे पड़े हैं या सीधे पर फिर भी कालांतर में फसल बन जाती है,

इसी प्रकार प्रभु नाम सुमिरन कैसे भी किया जाये उसके सुमिरन का फल अवश्य ही मिलता है।

राम जैसा नगीना नहीं सारे जग की बजरिया में।

नील मणि ही सजाऊँगा नयनो की पुतलिया में।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

प्रेरक कहानी: कभी-कभी भक्ति करने को मन नहीं करता फिर भी नाम जपने के लिये बैठ जाते है, क्या उसका भी कोई फल मिलता है?

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।