॥ दोहा ॥
काली कमली ओढ़ के, मोहन करे कमाल।
चित्र विचित्र नयनों बसे, बांके मदन गोपाल॥
॥ चौपाई ॥
काली कमली वाला मेरा यार है।
मेरे मन का मोहन तू दिलदार है॥
काली कमली वाला मेरा यार है॥
तू मेरा सखा तू मेरा मीत।
तुझसे ही लागी मेरी ये प्रीत॥
तेरे बिना सूना ये संसार है।
काली कमली वाला मेरा यार है॥
यमुना के तीरे गैया चरावे।
मीठी मीठी मुरली बजावे॥
सबके दुखों का तू ही हरनहार है।
काली कमली वाला मेरा यार है॥
चित्र विचित्र कहे ओ कन्हैया।
पार लगा दे मेरी ये नैया॥
तेरी कृपा से बेड़ा पार है।
काली कमली वाला मेरा यार है॥
॥ दोहा ॥
काली कमली वाले प्रभु, राखो अपनी छाँव।
चित्र विचित्र निरंतर जपे, तेरो पावन नाँव॥