ज्योति कलश छलके

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Arya Samaj Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ज्योति कलश छलके

ज्योति कलश छलके

ज्योति कलश छलके

ज्योति कलश छलके

हुए गुलाबी, लाल सुनहरे

रंग दल बादल के

ज्योति कलश छलके

घर आंगन वन उपवन उपवन

करती ज्योति अमृत के सींचन

मंगल घट ढल के

मंगल घट ढल के

ज्योति कलश छलके

पात पात बिरवा हरियाला

धरती का मुख हुआ उजाला

सच सपने कल के

सच सपने कल के

ज्योति कलश छलके

ऊषा ने आँचल फैलाया

फैली सुख की शीतल छाया

नीचे आँचल के

नीचे आँचल के

ज्योति कलश छलके

ज्योति यशोदा धरती मैय्या

नील गगन गोपाल कन्हैय्या

श्यामल छवि झलके

श्यामल छवि झलके

ज्योति कलश छलके

अम्बर कुमकुम कण बरसाये

फूल पँखुडियों पर मुस्काये

बिन्दु तुहिन जल के

बिन्दु तुहिन जल के

ज्योति कलश छलके

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।