जो भी आया तेरे द्वार खाली ना लौटा

संजय मित्तल
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॥ दोहा ॥

दाता एक सांवरिया, बाकी सब संसार।
झोली भर भर बाँटता, खाटू का सरकार॥

॥ चौपाई ॥

जो भी आया तेरे द्वार खाली ना लौटा, जिसने माँगा वो पाया।
मेरे बाबा ने सबको गले से लगाया॥
जो भी आया तेरे द्वार खाली ना लौटा॥

लाखों अभागों के भाग्य जगाए, रोते हुओं को तूने हँसाए।
कलयुग का ऐसा अवतारी ना देखा, जिसने बदल दी हाथों की रेखा॥
सारे जग में डंका बजाया, मेरे बाबा ने सबको गले से लगाया॥

आया था मैं भी किस्मत का मारा, तूने ही दिया मुझको किनारा।
अब तो जहाँ में शान से जीता हूँ, तेरे नाम का अमृत पीता हूँ॥
अपना बना के मान बढ़ाया, मेरे बाबा ने सबको गले से लगाया॥

संजय मित्तल गाए यशोगान, तू ही है खाटू का भगवान।
तेरी दया का अंत ना कोई, जय जयकार करे सृष्टि सोई॥
जो भी आया तेरे द्वार खाली ना लौटा, जिसने माँगा वो पाया॥

॥ दोहा ॥

लखदातारी की जय बोलो, शीश झुकाओ बारंबार।
संजय मित्तल वंदना, तारो हे करतार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

खाटू श्याम जी के दर की महिमा कि वहाँ से कभी कोई याचक निराश या रिक्त हस्त नहीं लौटता, सबको बाबा का अलौकिक प्रेम और अभीष्ट फल मिलता है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।