दाता एक सांवरिया, बाकी सब संसार।
झोली भर भर बाँटता, खाटू का सरकार॥
जो भी आया तेरे द्वार खाली ना लौटा, जिसने माँगा वो पाया।
मेरे बाबा ने सबको गले से लगाया॥
जो भी आया तेरे द्वार खाली ना लौटा॥
लाखों अभागों के भाग्य जगाए, रोते हुओं को तूने हँसाए।
कलयुग का ऐसा अवतारी ना देखा, जिसने बदल दी हाथों की रेखा॥
सारे जग में डंका बजाया, मेरे बाबा ने सबको गले से लगाया॥
आया था मैं भी किस्मत का मारा, तूने ही दिया मुझको किनारा।
अब तो जहाँ में शान से जीता हूँ, तेरे नाम का अमृत पीता हूँ॥
अपना बना के मान बढ़ाया, मेरे बाबा ने सबको गले से लगाया॥
संजय मित्तल गाए यशोगान, तू ही है खाटू का भगवान।
तेरी दया का अंत ना कोई, जय जयकार करे सृष्टि सोई॥
जो भी आया तेरे द्वार खाली ना लौटा, जिसने माँगा वो पाया॥
लखदातारी की जय बोलो, शीश झुकाओ बारंबार।
संजय मित्तल वंदना, तारो हे करतार॥